"Khwaish"
Updated: Jun 1, 2023
By Vandana Aasif
सोच लिया था कभी आऊंगा नही
बुनी हुई ग्रंथियों को
सुलझाऊंगा नही
तुम भी मन ही मन शिकायते
करती हो मेरी तरह
पर इतना कमजोर थोड़ी हूं
दिखाऊंगा नही
जिंदगी के पल फिसलते है तो फिसल जाए
जिंदगी को हाथ बढ़ाकर
गले से लगाऊंगा नहीअसमंजस में जिंदगी
क्यों फिर गुजरी जा रही है
सुलझी हुई खूबसूरत जिंदगी
ले कर तुम तक क्या आ पाऊंगा कभी ?
Forget everything
Take step
And make this day
Happiest and gay
By Vandana Aasif

Comments