Khuda Or Insan
By Ankit Gupta
कभी कभी मैं खुद से ये सवाल करता हू |
जब होना ही किस्मत का है तो ना जाने क्यू खुदा से बवाल करता हु ||
ऐ खुदा बता दें बस इतना मुझे ,
क्यों करता है इंसान मुसीबत में बस याद तुझे |
ये इंसान तूझे बाहर ढूंढने क्यू जाता है ,
जब तू हर जगह समाता है |
जब पहले से ही है किस्मत में लिखा , तो क्यू करता है इंसान तुझसे इतनी फरियाद |
क्यू है कोई दुःखी यहाँ ओर क्यू है कोई आबाद ||
ऐ खुदा क्यू बनाया तुने इतना मजबूर इंसान ,
जिसे प्यारी है बस अपनी शान |
चंद कागज़ के तुग़डो के खातिर , जो बेच देता है लाखों का ईमान |
क्यू उठा ली तूने वो कमान की चला दिया ऐसा बाण ,
जो बन गया ऐसा इंसान |
ऐ खुदा क्या जरूरत थी क्या मजबूरी थी तेरी ,
या तू भी लोभी था कि बस पूजा हो मेरी |
कहीं न कहीं तू भी ये सोचता तो होगा ,
थोडा ही सही खुद को खोश्ता तो होगा |
गर मैं ना करता ये खता ,
तो यूं संसार को न मिलती ये सजा |
ऐ खुदा ओरो का छोड , तू खुद के बारे मे इतना तो सोच लेता |
अगरतूनाबनातायेइंसान , तोतूखुदकितनेसकूँनसेरहतामेरेभगवान ||
By Ankit Gupta

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