Khamoshi
By Shlok Jain
खामोशी अक्सर कुछ बाते कह जाया करती है,
शब्दो में पिरोए हुए मोतीयो की चमक भी हलकी पड़ जाया करती है,
मगर खामोशी अक्सर दिलो में घर कर जाया करती है,
आसन नहीं खामोश रह पाना,
मगर हिम्मत के काम अक्सर किया करते हैं,
कहना जरुरी नहीं हर बात को,
चुप रह कर भी जवाब दिया करते हैं,
ये तो समझाने वालो के नज़रिये पर है,
कुछ बात में, तो कुछ सन्नाटे में खुद को तलाश लिया करते हैं,
खामोश रहना भी आसन नहीं।
खामोशी किसी की आदत नहीं,
जरुरत होती है,
खामोशी में अपनी बात कह जाना, ये कला किसी किसी में होती है,
शब्द कहा खतम हो जाए किसी को पता नहीं,
मगर खामोशी अक्सर उससे बड़ी बात कहा करती है।।
By Shlok Jain

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