Kal hi Ki Baat
Updated: Sep 16, 2025
By Rishabh Kandari
इन दिनों मुझे ना ख़ुशी की तलाश है,
ना ख़्वाबों के शौक़,
ना अभिलाषा की प्यास है |
इन दिनों मै अक्सर कुछ,
सवालों से घिरा रहता हूँ,
व्याकुल सा थका हुआ,
मै अंधकारों मे पड़ा रहता हूँ |
मै स्थिर बैठा रहता हूँ,
ख्यालों में खोया रहता हूँ,
दिन दहाड़े होश मे भी,
मै सोया सोया सा रहता हूँ |
मै आनंद से आनंदित नहीं,
दुःख से दुखी नहीं,
मुझे बेरंग सा लगने लगा है सबकुछ,
जैसे जीते रहने की भूख ही नहीं |
By Rishabh Kandari

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