Kahani
By Rishabh Kandari
सवालों से घिरा व्यक्तित्वा है मेरा,
मेरी छवि पर मुझे नाज़ तो नहीं है |
पर सारे सवालों के जवाब ज़रूर हैं,
ये खुली किताब सी है कोई राज़ तो नहीं है |
ये भी एक किस्सा जिसका शीर्षक तुम्हारे नाम किया,
माना कहानी में तुम्हारी आवाज़ कहीं नहीं है |
और ऐसे कितने ही किस्से मैंने लिखकर भुला दिए,
मेरी कहानी तुम्हारे किरदार की मोहताज तो नहीं है |
By Rishabh Kandari

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