Kabhie Socha Na Tha
By Mukesh Khubchand Kungwani
वक्त होगा इतना बेरहम यह कभी सोचा ना था,
मरहम लगानेवाला खुद देगा ज़ख़्म यह कभी सोचा ना था,
सींचा था जिस बगिया को लहू से अपने,
उन्ही के काँटों से होगा वो लहुलोहान ये कभी सोचा ना था,
जलाए थे जो चिराग़ करने को रोशन मेरा आँगन,
वहीं जला देंगे मेरा दामन ये कभी सोचा ना था,
जीते थे जिसकी यादों में हर घड़ी,
उसकी ही हर याद कर देगी जीना दुशवार ये कभी सोचा ना था ।
By Mukesh Khubchand Kungwani

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