Kabhi Na Ho Aisa
By Pooja
चाहे टूटे लाखों इमारत, पर घर किसी का टूटे न।
चाहे मारे दुनिया ताने, पर भाई का भरोसा उठे न॥
चाहे हो नाराज किसी से कितना, पर माँ से बच्चा रूठे न।
छुटे चाहे सौंसे मेरी, पर हाथ पिता का छूठे ना॥
गाहे रोऊ दिन रात मैं हर दम, पर बहनों के ऑसू फूठे न।
लूटे चाहे सारी धन ढौलत, पर कह के दोस्त कोई लूटे न॥
रिश्तों में इतनी ढरारें, अब लब्ज जुबाँ से उठे न।
चाहेटूटेलाखोंइमारत, परघरकिसीकाटूटेन॥
By Pooja

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