Kaash
By Tanuja Thakur
काश…
वक़्त के पैर नहीं होते,
और पैरों के निशान।
ख़्वाहिशों के पंख न होते,
और ख़्वाबों की उड़ान।
रात लम्बी न होती,
और फ़िक्र सारी रात करवटें न बदलती।
काश..
आईना अक्स न दिखाता,
और चोट ज़ख़्म।
रास्ते तंग न होते,
और मंज़िलें पहुँच से दूर।
बीते हुए दिन अक्सर याद न आते,
और न यादों की जकड़ में होता ज़हन।
रिश्ते पहेली न होते और,
जवाबों के बग़ैर सवाल।
न कोई चाह होती,न हसरत,
न कोई अफ़सोस,न कश्मकश।
ज़िंदगी शांत समुंदर होती,
थोड़ी सी और ख़ूबसूरत होती॥
By Tanuja Thakur

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