Jindagi (जिंदगी)
By Vedika Datttatray Tole
एक वक्त था जब तूने मेरी जिंदगी सजाई थी ,
सोचा तब वो तुही जिसने धडकने बढाई थी |
उस पल जो बोले तूने वो दो लब्ज ही काफी थे ,
ऑंखोसे बहने वाला पाणी सजा नही वो माफी थे|
जो दर्द है दिया तूने मेरे दिल को वो जरुरी नही,
इश्क तेरा देना तेरी ख्वाईश थी मजबुरी नही |
हर पल गुजारा साथ, यादे नही वो आरी है,
जहर जैसे नजरे तेरी पीने की तयारी है |
ख्वाब सारे टूट गये दिल ये मेरा घायल है ,
सिर्फ इतना याद है मुझको की तू बेवफा बेचारी है|
ऑंखे मेरी सिर्फ खुली है जान ये तरस्ती है,
एक पल के यादो से ऑंखे मेरी बरसती है |
महसूस नही होता है दर्द मेरा दिल भी ये रोता है,
जिंदगी ये मौत मेरी पल दो पल मे हसती है |
By Vedika Datttatray Tole

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