Jindagi Ak Kagaz
By Mohini Patel
एक कागज जो खाली सा है,
उसमें लगती कुछ कमी सी है,
तभी न लगे कुछ किमत उसकी।
लिखा जो उस पर कुछ जाये जो,
लाखों करोड़ों की हो किमत उसकी,
क्योंकि उससे बढ़ी शोभा उसकी।
कुछ ऐसा ही हाल जिंदगी का मेरी,
कोरे कागज सा अभी है हाल उसका,
वहीं वज़ह से है अघूरी ये जिंदगी मेरी।
लिखना मुझे भी कुछ जरूरी सा उसमें,
इंसानियत का ज़रा सा करके इस्तेमाल,
करना है सार्थक अब यह जिवन मुझे।
By Mohini Patel

Comments