Jeevan Yatra Chalti Rahe
By Samira Gupta
नन्हे कन्हैया की बड़ी लीलाऐं
नटखट कान्हा की परिपक्व कथाऐं
दिल को लुभाऐं, जीने का ढंग भी सिखायें...
कभी माखन कभी बांँसुरी कभी सुदर्शन चक्र
कर वही, करों के खिलौने बदलते रहे
फिर भी जीवन यात्रा यूंँ ही चलती रही...
कभी मथुरा कभी वृंदावन कभी कुरुक्षेत्र
माटी वही, माटी की खुशबू बदलती रही
फिर भी जीवन यात्रा यूंँ ही चलती रही...
कभी ग्वाल कभी नरेश तो कभी सारथी
देह वही, देह के चोले बदलते रहे
फिर भी जीवन यात्रा यूंँ ही चलती रही...
कभी नटखट कभी हितैषी कभी ज्ञान का स्त्रोत
भले ही जीवन का रूप बदलता रहा
फिर भी जीवन यात्रा यूंँ ही चलती रही...
छूटे साथी भी प्रेम भी और कूचा भी
जब तक न छूटीं सांसें, आगे बढ़ते रहे
और जीवन यात्रा यूंँ ही चलती रही...
इस कर्मभूमि में जब ईश भी आऐ
काल-चक्र से बच न पाऐ
तो हर हाल में कर्म करते चलो
चूंकि जीवन यात्रा यूंँ ही चलती रहे
जीवन यात्रा यूंँ ही चलती रहे.
By Samira Gupta

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