Jee Rahe Hain Log Kaise
Updated: Jun 6, 2023
By Ankit Dixit
जी रहे हैं लोग कैसे आज के वातावरण में।
नींद में दिन डूब जाता रात्रि कटती जागरण में।।
जी रहे हैं लोग कैसे आज के वातावरण में।
सिंह भूख़ों मर रहे हैं, घर गधों के खीर बनती।
सीखती है गीत कोयल बैठ कौवों की शरण में।।
जी रहे हैं लोग कैसे आज के वातावरण में!
घोर कलयुग है कि देखो; राम रावण बन गए हैं।
लक्ष्मणों का हाथ होता आज सीता के हरण में ।।
उत्कोच के बाज़ार में इंसान की कीमत घटी है।
देखते हैं दोष बगुले हंस के हर आचरण में।।
आँख हो बेशर्म तो ये व्यर्थ घूंघट क्या करेगा?
आदमी नंगा खड़ा है,सभ्यता के आव रण में।।
जी रहे हैं लोग कैसे आज के वातावरण में …
By Ankit Dixit

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