Intezar Chithi Ka
Updated: Jun 9, 2023
By Shivani Prasad
इंतजार होता था जिस डाकिया काका का
जिनके आते ही चेहरे पे खुशी छा जाती थी
इंतजार होता था जिन चिट्ठियों का
जिनको पा कर चेहरा पर रौनक होती थी
इंतजार होता था जिस खुशबू का
जो चिट्ठियों को खोल कर उन्हे
पढ़ने से पहले महसूस हुआ करती थी
इंतजार होता था जिस सुकून का
जो चिट्ठियों को पढ़ कर हुआ करता था
अब तो इंतजार खत्म हो चला है
रिश्तों का वह प्यार खत्म हो चला है
हाथ मे महंगा मोबाइल है जो सिर्फ
हर रोज चार्ज और हर महीना रिचार्ज होता हैं!
पर मोबाइल की घंटी शायद ही बजती हैं!!
लोग मैसेज या एक कॉल पर ही
हाल चाल भी पूछ्ते हैं
पर वह माहौल नहीं होता है
जो इतनी दूरी और इंतजार पर
चिट्ठियों के मिलने पर होता था
आज रिश्ते महज एक कागज के फूल हैं
जिनमे सुगंध नहीं होती रिश्ते दिखते तो असली हैं
पर उनमे वो कोमलता और खुशबू नहीं होती!!!!
रिश्तो मे पहले जैसी सचाई नहीं होती
चैन और सुकून नहीं मिलता
इंतजार होता था जिन चिट्ठियों का
अब वो चिट्ठियां नहीं मिलती!!!
By Shivani Prasad

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