Immortal Bharat ( Amaratv Bharat)
By Divyanjali Chauhan
कवि -
शुरू हुई यह तब कहानी जब खोली आंखें उसकी गोद में
मिला प्रेम, साहस का उस वक्त से
जहां भरी पड़ी थी झिलमिलाहट की रेत में
कुछ नए तो कुछ पुराने हिस्से
आंख खुले शुरू हो जाए, सांस रूके तो भी चलती जाए
भारत |
भारत -
मेरा आकार तो सिर्फ एक रूप है
मुझे इंतजार है उस कहानी का
जो तुम्हारे द्वारा लिखी जाएगी
इतिहास के पन्नों पर तुम्हारे धैर्य और दृढ़ता की
किस राह को चुना तुमने यही तो तुम्हें बतलाना है
कवि –
सिर्फ आकार नहीं रंगों से भरा अटूट प्रेम हो
अपनों से भरा संसार हो
घटनाओं का पुराण हो तो तुम
भारत -
मेरे जन्म की गाथा भगिरथियों से मिला एक आशीर्वाद है
पूर्ण व्याख्याओं की वह पवन गति
लहराती समुद्र की बौखलाहट है
ज्वार भाटा से उभरा हुआ सागर
भाव दर्शाता मेरा इस पृथ्वी पर आधार है
कवि -
भारत अभिमान है
आत्मा का दर्शन से जो मीरा का है श्री कृष्ण से
चाणक्य की शिक्षा से
एकलव्य का उत्साह से
ताजमहल का सौंदर्य से
आर्यभट्ट का शून्य से
देश प्रेमियों का तुमसे
भारत –
ह्रदय एक रणभूमि है तैयार महत्वाकांक्षाओं की तलवारे
साथ अडिग हमारा हर एक युद्ध में
परिपूर्ण होगा सारा का सारा जीत हमारा
हे योद्धा तू सिर्फ बचा हमको
अंधविश्वास, सामाजिक जंगो से
कर नष्ट उनको,
तुमको हर एक नए आगाज़ से मिलाएंगे
महानता जन्म लेती है मेरी हर एक नए क्षण में
कदम बढ़े अगले पल में, मानव नई खोज को को राह दिखाएं
कवि -
मैं खुद में ही भारत हूं
ऋतुएं मै वो जिन्हें वक्त का इंतजार नहीं
सामने दुश्मन हो तो बिन दिन तपती धूप के लाल लहू की आग हूं
प्यार जो दर्शाए उस पर शीतलता और नम्र की बिन मौसम बौछार हूं
मैं इस देश की धूल और मिट्टी से बनी
दहकती तलवार हूं, मैं दहाड़ू तो आसमान भी ललकार उठे
सर कटे मेरा इसके सम्मान में
मैं शरीर नहीं करोड़ों की एक आवाज हूं
मैं भारत
मैं हिंदुस्ता
मैं सारा जहां हूं !
By Divyanjali Chauhan

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