Imaan Ke Saudaagar
Updated: Jul 28, 2025
By Sakshi Singh
जब तक जान है तब तक जहां है।
पर जहां की इसी मजबूरी में,
इंसान हो रहा बेईमान है।
नही हो रहा असर लोगो की उम्मीदों का उस पर;
दांव पर लगा कर जान दूसरों की,
वो इक्कठा कर रहा बेइमानी का सामान है!
By Sakshi Singh

Comments