Ik Mulaqaat
By Anvita Tantia
जब गुज़रे हम करीब से उनके
इक सूता उनके दाहिने आस्तीन का
छू गया हाथ को हमारे कुछ इस तरह जैसे
तपती रेत पर बारिश की एक बूंद गिर कर
भाप बन गई हो
न देखेंगे उन्की ओर, बेपरवाह रहेंगे
इरादा तो ये ही किया था हमने ज़ेहन में मगर
तस्वीर उतारने के बहाने, camera को zoom करके
उस मुस्कुराते चेहरे के नूर से
जी तो भर ही लिया आंखों ने
गले तो बार बार लगते हैं लोगों से हम
खुशी में, गम में या फिर मदहोश, मगर
जब उनको गले से लगाया
और वो जो सुकून पाया
वक्त थम जाए, ऐसा खयाल आया
सबको बताते फिरते हैं फक्र से
की अब कोई वास्ता नहीं है हमारा उनसे
हर इक मुलाकात पर इल्म होता है
इस कमबख्त दिल से उनको
गैरनकरपाएंगेहम
By Anvita Tantia

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