Hunar
Updated: Dec 3, 2022
By Hrishal Golchha
कुछ गम थे मेरे सीने में जो लफ़्ज़ों ने नकार दिये,
कुछ अरमान थे दिल में जो दुनिया ने बिखार दिये,
अब बस चुपचाप सर झुकाए सपनों के दरवाज़े पे खड़ा हूँ,
अब बस चुपचाप सर झुकाए सपनों के दरवाज़े पे खड़ा हूँ,
उन बिखरे टुकड़ों से नये अरमान सजाने लगा हूँ,
ख़ामोश ज़रूर हूँ
पर हारा नहीं हूँ,
वक्त ग़लत है मेरा
हुनर का मरा नहीं हूँ..
By Hrishal Golchha

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