Humsafar
Updated: Jul 29, 2025
By Shivani Acharya
सच कहते है, ज़िन्दगी बन जाती बहोत मुश्किल,
ख़तम हो जाये जब रास्ता , और अभी पानी हो अपनी मंजिल ।।१।।
राह ताके चारों और निगाहें फिर थक जाती है,
क्या करे कैसे करे हज़ारो सवाल घिर एते है ।।२।।
सड़क कही दिख पड़ती , पर राह होती बहोत कठिन,
लगने लगता मन ही मन में, आगे बढ़ना अब नामुमकिन ।।३।।
मन करता तभी बैठु कोई शीतल पेड़ की छाँव तले
सच कहते है, ज़िन्दगी बन जाती बहोत मुश्किल,
ख़तम,
सोच सकू समझ सकू , की अब चलें तो कैसे चलें ।।४।।
दूर दूर तक न कोई छाँव न कोई पेड़ नज़र आता है,
ऐ खुद ! ऐसे कैसे तू इतना कठोर बन जाता है ?।। ५।।
काँप उठता है मन ,जब हौंसला जवाब दे जाता है,
एक सैलाब , अंधी तूफ़ान सभी ख्वाहिशे ले जाता है ।। ६।।
तभी आती एक नह्नि किरन ! कहती , यही तोह है जीवन!
हल होगी हर मुश्किल तेरी, बुलंद होगा जब तेरा मन ।। ७।।
मिल जाएगी मंज़िलें तुझे, तू राह पे चलना शुरू तो कर,
अकेला नहीं है तू किसी मोड़ पर ,एक बार ऊँची तो कर नज़र ।।८।।
हाथ फिर कोई थामेगा, राह फिर कोई दिखायेगा,
साथ होगा जब तेरा हमसफ़र, मंज़िल अपनी तू पायेगा ।। ९।।
By Shivani Acharya

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