Hindi Poem
By Aashish Shrivastava
वो जब नहीं रहती तो ये घर मकान लगता है
उसके बिना ये शहर अब सुनसान लगता है
और हाथों उसके क्या अजब जादू है
बांसी हुई सूखी रोटी भी पकवान लगता है
उसका आशीष रहता है मुझ पर इस तरह
कोई भी देखें तो कहें तु बड़ा भाग्यवान लगता है
By Aashish Shrivastava

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