Hindi Gazal
By Aqeel Agaz
हम भी तो आस लगाए बैठे हैं खरीदारों में
बिकने को कब आएगी हसीं बाजारों में
देख किरणों को सुबह बहुत रोयी शबनम
कुछ तो कहा होगा फूलों ने इशारों में
इलाही कैसा वक्त है किनारों को भी डर है
कहीं बह न जाए हम तुफानी धारों में
सोचता हूँ ज़ख़म देने वाले नश्तर कहाँ देंगे
मैरा जिस्म बंट गया है छोटी-छोटी दरारों में
उनके ज़हनों में जाले हमारी ज़बान में ताले हैं
अफसोस सच बात भी कहना पड़ी इशारों में
By Aqeel Agaz

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