Halat Kavi Ke
By Ankit Kumar Roy
रिश्ता करने आते वो,
मुझसे अपनी बेटी का ,
रोक दिया था लोगों ने फिर,
दिए वास्ता रोटी का।
ये कह कर की,क्या देगा वो,
कवि तुम्हारी बेटी को,
भूख लगे तो बोलेगा की,
चाट लो मेरी पोथी को।
फिर भी पेट भरे नहीं तो,
सुनो कविता मेरी तुम,
एक नही दो चार सुनो जी,
पर न मांगो रोटी तुम।
कपरो की कोई बात नही है,
पैसों से मुलाकात नही है,
अरे इन कवियों को गोली मारो,
इनकी तो कोई जात नही है,
बातें इनकी बरी बरी है,
किस्मत इनकी फटी पड़ी है ,
फिर भी देखो हस्ते रहते ,
बेशर्मों की लगी परी है।
कल का इनका पता नही है ,
आज में कुछ भी बचा नही है,
फिर भी ऐसा ढोंग ये करते ,
जैसे कुछ भी घटा नही है।
और बताऊं बात तुम्हे क्या ,
इन साले कवियों की मै ,
सबसे बेहतर देखा हमने,
क्योंकि एक कवि हूं मैं।
By Ankit Kumar Roy

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