Halaat
By Ankit Samariya
हालात अपने देख कर आँखें अक्सर मेरी भर आती है
सोचता हूँ की ऐसा क्या घटित हुआ जो ऐसा हो गया हूं।
रोना बहुत आता है, कोसता भी हूं में खुदको
सोचता हूं कल से सब ठीक कर दूंगा
लेकिन वो कल कभी आता नहीं।
पाया बहुत है लेकिन वो खुशी अभी भी ओझल है
किसी से कैसे करू मैं बयान
कोई गुजरा ही नहीं इस रास्ते कभी
अकेला राही हूं मुसाफिर कोई है नहीं।
कभी कभी सोचता हूं छोड़ दूं ये सब कुछ
आखिर ये सब भ्रम है और कुछ नहीं।
By Ankit Samariya

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