Gulistaan
By Prateek Misra
सूना सा इक बादल आसमां पे आ गया,
बन के सावन कोई गुलिस्तां मे आ गया,
फूल बहकने लगे,पत्तियाँ नाचने लगी,
नाम जैसे ही तेरा मेरी जबाँ पे आ गया,
तकते तकते तुझको सोचता हूँ अक्सर,
कैसे कोई फरिश्ता इंसां मे आ गया,
आते जाते हवा अक्सर दस्तक देती है,
मुझे लगे तू मेरे मकां मे आ गया,
इश्क़ वो बला है जो टाले न टले,
उस दिल से निकाला तो जाँ मे आ गया,
करनी तेरी तू ही जाने मुंतज़िर,
साहिल से जो उतरा तूफ़ाँ मे आ गया।
By Prateek Misra

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