Gazal
By Aqeel Agaz
है जीस्त अब तबस्सुमें बीमार की तरह
जुल्मत में गम की सुबह के आसार की तरह
गिरता ही जा रहा हॅू अपनी नजर में आप
जिंदा हूँ फिर भी अश्के गुनहगार की तरह
किस तरह हम जलाएं उम्मीदों की मशअलें
दिल हो चुका है अपना शबे तार की तरह
फूलों को इस तरह से मसलकर ना फेंकिये
महकेंगे एक दिन मेरे अशआर की तरह
कितना बदल गया है जमाने का यह निजाम
"आगाज" दोस्त लगते हैं अगयार की तरह ।
By Aqeel Agaz

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