Gazal
By Aqeel Agaz
जख्मों को और दर्द दिये जा रहा हूँ मैं
खामोश रहकर आह किये जा रहा हूँ मैं
जो मुझको देखते नहीं इस राहे जीस्त में
उनकी तरफ निगाह किये जा रहा हूँ मैं
उसका कोई कुसूर नहीं चारा साजे गम
इल्जाम जिस नजर को दिये जा रहा हॅू मैं
राहे वफा में मिटके जमाने के वास्ते
"आगाज" जिंदगी का किये जा रहा हूँ मैं
By Aqeel Agaz

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