Gar Meri Mohobbat Mehsus Na Ho
By Ajay Jaal
गर मेरी मोहब्बत मेहसूस ना हो
आजाद हो तुम मुझसे जुदा हो जाना
गर मै तुम्हारे नाखुशी की वज़ह हूँ
तुम कहीं दूर जाकर मुस्कुराना
कोई पूछे गर के वो शख्स कैसा था
दिल मे रखना हाथ मेरे बारे बताना
बंदिश नहीं की तुम झूठ बोल
आजाद होठों में तुम गाली भी लाना
ग़र कोई और तुमको ख़ुश रखे हो
मेरी सलाह है मुझे भूल जाना
मैं मुझसे दूर जाने की तुम्हें वज़ह दूँगा
तुम मुझसे दूर रहने का देना बहाना
अगर मै हूँ गलत pachhtaunga मैं
ये दिल हर वक़्त मुझको देगा ताना
अगर तुमको लगे के तुम गलत हो
ना हो तुमको झिझक मेरे पास आना
गर मेरी मोहब्बत मेहसूस ना हो
आजाद हो तुम मुझसे जुदा हो जाना
गर मैं तुम्हारे नाखुशी की वज़ह हूँ
तुम कहीं दूर जाकर मुस्कुराना
By Ajay Jaal

Comments