Firdaus Hua
By Parul
फिरदोस हुआ फिरा हूँ मैं ,
इश्क़ में तेरे क्या से क्या बना हूँ मैं ।
जिन नज़रों से देखा हैं तूने मुझे ,
बिना छुए वक़्त की तरह कटा हूँ मैं ॥
पाए बिना भी तेरे संग रोज सोया हूँ मैं ,
बिना छुए तुझे हक़ीक़त की तरह जीया हूँ मैं ।
पिघल के जो तू उतरी हैं मेरे सीने में ,
घूँट घूँट करके लबों से पीया हूँ मैं ॥
अंधेरो ने जरा सा डराने की चाह क्या राखी ,
उन्ही के सायों से तुझे साझा किया हूँ मैं ।
तू क्या जानेगी इशक़ क्या बल हैं ,
तेरे लिए आस्मां और जमीं एक कर सीय हूँ मैं ॥
तू छू के देख.... जरा संभल के देखना ,
कई दफा अपनों को ही खरोंच दिया हूँ मैं ।
ऐसे ही नही सींची 'दिल' की जमीं ...यादों के नमकीन पानी से ,
जब तू दूर हुई हैं ... दिल के हज़ार नौनिहाल कर दिया हूँ मैं ॥
समझ न आये तो बता देना ,
हुनर मैं अपना फिर से दिखा दूंगा ।
जो मोती मैंने अभी पिरोये हैं ,
उन्हें एक धागे में फिर से ला दूंगा ॥
न हो यकीन तो रंज नही ,
तेरी आदतों से अछे से वाकिफ हो लिया हूँ मैं ॥
By Parul

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