"Faridabad Mein Jalebi"
Updated: Jun 1, 2023
By Vandana Aasif
"क्या मेरे जमीर ने आंखे मूंद ली"
फरीदाबाद में जलेबी का लुत्फ उठाने के बाद
ये एहसास हुआ
पर ऐसा क्या खास हुआ?
बताती हूं आपको
शायद ऐसे ही कम कर सकूं कुछ पाप को
जलेबी दोने में लेकर लालच को
पुचकार रही थी संतुष्ट कर रही थी अपने आप को
पास आकर खड़े थे एक कुत्ता,एक भिखारी
सहन न कर पाई मै,उनकी भूख लालच से भरी आंख को
पीठ कर उनकी तरफ, मुंहमें डाल लिया जलेबी की फांक को
एहसास था कि दोनो पीछे ही खड़े है भूखी नजरें चुभती है आप को
क्यों सोचूं ? सबका क्या मैंने ही ले रखा है ठेका
अरे जाओ और किसी से मांगो किसने है रोका
खा कर, दोना बस एक तरफ फेंका ही था
भिखारी और कुत्ता ऐसे झपटे,ऐसा नज़ारा कभी देखा न था
दोनो में भयंकर युद्ध छिड़ गया था
कुत्ता तो ठीक है भिखारी कुत्ता बन उससे भिड़ गया था
आदमी की दुनिया में जानवर कहां टिकता है
भूखा होने पर ज़मीर सटा सट बिकता है
भिखारी जीत और लालच की मद में दोना चाट रहा था
कुत्ताइंसानोंऔरइंसानियतकीदुनियामेंजरासीचाशनीकेलिएमातखागयाथा
By Vandana Aasif

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