Farak
By Prince Nayak
हां मैं थोड़ा अलग सोचता हूं...
होंथो से ज्यादा आंखों के जज्बात देखता हूं।
फरक सिर्फ इतना है तेरी और मेरी सोच में..
तुम बात देखते में उसके हालात देखता हूं..
हां मैं थोड़ा अलग सोचता हूं..
अपने सवारे में अंधेरों में गुजारे है..
साथ रह कर भी काई लंभे में अकेले गुजारे हैं।
शायद तुम से थोड़ा अलग हूं इसीलिए
तू नींद में चैन तो मैं चैन की नींद ढूंढता हूं..
हां में थोड़ा अलग सोचता हूं..
ये सामाजिक मोल भव मेरा हिस्सा नहीं..
यहां में किसी का किस्सा नहीं..
फरक तो अभी भी बहुत है तेरी और मेरी सोच में..
तुम घर में सुखूं तो मैं सुकून का घर ढूंढता हूं..
हन मैं थोड़ा अलग सोचता हूं
By Prince Nayak

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