Ek Bhor Abhi Bhi Baki Hai
By Damini Akhilesh Dubey
अभी शाम हुई तो क्या?
एक भोर अभी भी बाकी है।
ताना-बाना टूट गया,
एक डोर अभी भी बाकी है।
ये जीवन का समुद्र है,
अथाह है, अनंत है।
इसी की गहराइयों में
एक छोर अभी भी बाकी है।
सारे पंछी आखेट हो गए
पर मन के इंद्रधनुष का
एक मोर अभी भी बाकी है।
अभी शाम हुई तो क्या?
एकभोरअभीभीबाकीहै।
By Damini Akhilesh Dubey

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