Ek Banjaare Ka Geet
By Jwala
दुनिया का सारा उजियारा तू रख ले पर ये अंधियारा मेरा है
सारा कुछ संगीत तू रख ले पर ये सन्नाटा मेरा है
नदियों का सारा पानी रख ले पर ये बंजर मरू मेरा है
धरती का इक-इक कोना रख ले पर आकाश का तारा मेरा है
भू-तल की सारी खुशियाँ रख ले
छीन किसां की हंसिया रख ले
खेत क्या, गिरवी जान भी रख ले
पर छूना न इस चारे को, ये भूस का चारा मेरा है
गीता का सारा ज्ञान तू रख ले
मंदिर रख ले, भगवान तू रख ले
ले गुरबानी-आज़ान भी रख ले
पर छूना न इस प्याले को, ये ज़हर का प्याला मेरा है
सब कलम-किताबें-स्याही रख ले,
प्यासे से छीन सुराही रख ले
ले सेना-पुलिस-सिपाही रख ले
पर मन का क्या करेगा?
ये मन बंजारा मेरा है।
ये मन बंजारा मेरा है।
By Jwala

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