Devnagari (Hindi)
Updated: Sep 16, 2025
By Sonal Mathur
भरोसा हो तो आसमान छू लिया जाता है,
ना भरोसा तो कदम बढ़ाने पर भी शक आता है।
हो भरोसा खुद पर तो ताकत बन जाता है,
कर भरोसा गैर पर तो कमज़ोरी बन जाता है।
आदतन शक शामिल हुआ करती हैँ अक्सर,
उड़ जाता है भरोसा झट भाँप बनकर।
फिर तमाम कोशिशें व्यर्थ सी लगती हैँ,
भरोसे में थोड़ी कसर-सी लगती है।
चाह रही पाने की तमाम खुशियाँ अगर,
कर भरोसा इससे पहले ख्याल अलग आता है।
रूह से रूह तक का सफर तय हो जाता है,
सर्फ़ तन ही नहीं, मन भी फ़िदा हो जाता है।
आज़माने का तुझे मन करता है,
भरोसा करने का फिर मन कर जाता है।
कोई चाह कर भी भरोसा नहीं पाता,
और कोई भरोसा कर के भी चाह नहीं पाता।
आजकल फरेब कहीं-न-कहीं छुपा होता है,
इसलिए भरोसा करना किसी पे कठिन होता है।
डरता है मन दूसरों से धोखे को खाने में,
जबकि अपने ही तोड़ते हैँ भरोसा आने पे।
माफ़ किसी को बेशक बार-बार किया करते हैँ,
टूट गया भरोसा जो सिर्फ एक बार किया करते हैँ।
नहीं दो यह मौका की तुम हरबार बिखर जाओ,
ना दो यह हक किसी को की टूट तुम जाओ।
ना दो यह हक किसी को की टूट तुम जाओ।।
By Sonal Mathur

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