Dekho Apna Dosh
By Pooja
सबसे बड़ा दोष यह, दिखता ख़ुद में दोष नही|
मानव जन्म मिला है, फिर भी संतोष नहीं॥
उठता, फिरता,गिरता, मंजिल क्या कुछ होश नहीं|
मन की मस्ती करता फिरता आनंद का बोध नहीं॥
किसी को क्या समझाए, जब मन अपना ही ठोस नहीं,
क्या सोचे मिल जायेगा, यह पल और कहीं |
यही है दुनिया स्वर्ग नरक की इससे बड़ा न मोक्ष कही॥
By Pooja

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