Dard Me Pr Paaj As Keeygh kaameghy Yth Yaavt Yeet
By Jitendra Saini
सब यज नाम अग दिया भ ज अज ना यझ
सुन ओह बेवफा, तूने जीते जी ही मार दिया
लगा के रोग इश्क का, आज बेजान कर वा दिया
एक साथ, सब खत्म कर दिया एक ही पल वा में
निकल वाकर बाहर, तूने दुबारा पर फिंकवा दिया जल वामें
बनाकर तेरा दीवाना, बसाई तूने मेरी दुनियाँ
पर सँजों के तूने ही, आज उजाड दिया वो ही आंशियाँ
हँसाया था मैने तुझे, पर तूने हँसी करवा दी
ओह देवी, दिल में सीधे ही छुरी चला दी
करूँ तो क्या करूँ, इस बात ने खामोश बना दिया
तेरे वाले इश्क ने, मुझे बिल्कुल पगला दिया
आज मै जमीं पे, और तू आँसमां में उड रही है यट
लूटकर मुझे पर, बडे - बडे पंख फैला रही है झट कमदकट या यट
ख्वाब तो तूने, बहुत दिखा दिये मुझे
खूब कमा भट इग्नोर कर, पर यजमान चाहता रहुँगा तुझे
सच में, तू अपने - आप को ना जानें क्या समझती है यार
कैसे चाहेगा तुझे कभी कोई, जब तू उसकी कदर मरजा बा देती है
मज एज क भागजन ब ह ज नाज बट
तू लडकी नही, कोई पत्थर है सम
अन्दर दिल नही, लोहे का यन्त्र है सम
मत बोल, पर कम से कम स्माइल तो दिलवा देती
तू लडकी होती, तो पहले ही पिघलवा जा बा देती
चाहूँ तो अगर मैं, तेरी हरकतों पर बाज आ जाऊं
लिख दूं मगर तुझे ही फर्क नही सम, तो मै फिक्र क्यूँ बजाऊं
देकर आँसू हमें सम, क्या तू खुश रह पाएगी ?
रोयेगी मगर तू सब, जब याद बगर शायर मजाब आएंगी
By Jitendra Saini

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