Dag (दाग)
By Suyash Muluk
पता है मुझे,
तुम जान-बुझकर पूछ रही हो
मेरी आँखों के नीचे उठे
काले दागों कि वजह,
क्योंकी तुम भी अच्छी तरह जानती हो,
ये दाग जिक्र करते है
वो सारी रातों का,
जो राते मैने किसी गजरे की तरह
तुम्हारी ज़ुल्फो मे सजायी थी;
पता है मुझे,
तुम जान-बुझकर पूछ रही हो;
By Suyash Muluk

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