Dadi Maa
Updated: Sep 16, 2025
By Tanya Dhillon
ऊंगली को पकड़ के जिन्होंने चलना सिखाया, अपने सीने पर सिर रखकर सोना सिखाया, अपने कंधों पर बैठा कर दुनिया घूमना सिखाया, दुनिया दिखाई, दुनिया का रंग दिखाया,
कौन अपना है कौन बेगाना यह अपना सालों का तजुर्बा मुझे सिखाया,
वो और कोई नहीं मेरी दादी थी।
मां से भी बढ़कर, जिसने प्यार दिखाया अपने हिस्से का निवाला भी मुझे खिलाया, पापा की डांट, दादा का गुस्सा, सबसे मुझे बचाया मां से भी छुप-छुप के मुझे सब कुछ दिलाया बूढ़ी आंखों से कुछ दिखता नहीं था, पर फिर भी मुझे ढूंढ लेती थी।
पैरों में जान नहीं थी, पर मेरी एक आवाज में मेरे पास खड़ी मिलती थी।
मेरे एक आंसू बहने पर सारे घर को आगे कर लेती थी, वह और कोई नहीं मेरी दादी थी।
दादी तो चली गई, लेकिन उनके सिद्धांत याद है। उनका प्यार, उनसे तकरार, उनका गुस्सा सब याद है, 'खुशियां लेने वाले नहीं खुशियां देने वाले बनो', यह बात उन्होंने तब सिखाई थी, जब मैं पहली बार किसी खिलौने के लिए रोया था। मुझे याद है ।।
'असल में जिंदगी अलग-अलग रहने में नहीं सबके साथ रहने में है',
यह बात उन्होंने मुझे जब सिखाई थी, तब हमारे घर में तकरार हुई थी, मुझे यह भी याद है।
उनकी सीख, उनके असूल, मुझे सब याद है।
दादी तो मेरे पास नहीं, लेकिन मुझे उनके साथ बिताए हर पल याद है।
अब कभी वैसे तो मुलाकात होती नहीं, लेकिन कभी सपनों में, कभी बातों में, कभी यादों में बात हो जाती है।
हर बार उनकी बात याद आती है।
दादी तो नहीं आती, पर उनकी याद हमेशा आती है।
By Tanya Dhillon

Comments