Chattan
By Nagesh Krishna Parab
मुझे चट्टानो से टकराते हुये देखा होगा तुमने।।
अब मिट्टी मे मिलता भी देख !!
जंग में लड़ते हुए देखा होगा तुमने ।।
अब गिरता और लड़खड़ाता हुआ देख ।।
सपनो में ही सही, अपना घर बसाते देखा होगा मुझे तुमने ।।
अब उस हर सपने को राख होता हुआ देख ।।
ये हार मेरी नही है, जो मैं डर जाउ |
ये हर है अपने प्यार की |
इसलिए जमीन पे कटे हुए मेरे सर को तू हँसता हुआ देख ।।
By Nagesh Krishna Parab

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