Chahat
By Nausheen Sayyed
कुछ पाने की है चाहत मेरी,
कुछ खोने से मैं डरती हूं ।
अपने सपनों को जीने के लिये,
रोज रोज मैं मरती हूं ।
कभी करती हूं मनमानी,
कभी कभी मैं झुकती हूं ।
कभी बिखरती कभी हूं बनती,
नये रंगों में ढलती हूं ।
इस जिंदगी नाम की पहेली में,
बुरी तरह उलझती हूं ।
By Nausheen Sayyed

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