Chahat
By Ritu Sachdeva
ज़िंदगानीयों को खुशनुमा बनाना चाहता हूँ...
रिश्तों में प्यार भरना चाहता हूँ...
मंज़िलों की तलाश है...
पर सफलता पाना चाहता हूँ!
मैं सब कुछ कर सकता हूँ, पा सकता हूँ...
पर अहंकार से दूर रहना चाहता हूँ!
तू मेरे अंदर है, पर फिर भी मैं तुझसे मिलना चाहता हूँ!
तू तो खुदा है, इंसान की फितरत जानता है...
मैं इंसान तो हूँ, पर एक अच्छा इंसान बनाना चाहता हूँ!!
By Ritu Sachdeva

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