Bina Humrahi Zindagi Aduri Hai
By Pratiksha Singh
जिस चेहरे को देखकर और थकान मिट जाए
जिन आंखों में उतर कर हर ख्वाब सो जाए
जिस रूह को छूकर खुदा भी पाक हो जाए
ऐसी कहानी जरूरी है
बिना हमराही जिंदगी अधूरी है।
जिस हाथ की नरमी दिल में उतर जाए
जिन लबों की हसी से हर बोझ तर जाए
जिन जुल्फों के साए में जन्नत मिल जाए
ऐसी कहानी जरूरी है
बिना हमराही जिंदगी अधूरी है।
जिस गुस्से में प्यार की मीठी झलक दिख जाए
जिस रूठ जाने में भी फिक्र धीमे से मुस्काए
जिस डांट में भी अपनापन झरोखे से आजाए
ऐसी कहानी जरूरी है
बिना हमराही जिंदगी अधूरी है।
जिस कांधे पर सर रख हर शाम ढल जाए
जिस नूर के सदके से पलके खुद ब खुद झुक जाए
जिन सवालों के सामने खामोशी हाथ छोड़ जाए
ऐसी कहानी जरूरी है
बिना हमराही जिंदगी अधूरी है।
जिसके जिक्र भर से ही उदासी भी खिल जाए
जिसके दीदार से चांद भी शर्माए
जिसके कदमों की छुअन से ज़मीन खुशगवार हो जाए
ऐसी कहानी जरूरी है
बिना हमराही जिंदगी अधूरी है।
जिसके साथ होने के इल्म से मुस्कुराहटे बेपर्दा हो जाए
जिसके साथ आने पर धड़कनों में जंग सी छिड़ जाए
जिसके सामने कुछ कह जाने में अल्फाज लड़खड़ाए
ऐसी कहानी जरूरी है
बिना हमराही जिंदगी अधूरी है।
जिसे देख फरिश्तों पर भी एतबार सा हो जाए
जिसके साथ एक मुलाकात सौ ख़्वाब सच कर जाए
जिन हाथों में हाथ देकर चलने में एक उम्र छोटी पड़ जाए
ऐसी कहानी जरूरी है
बिना हमराही जिंदगी अधूरी है।
By Pratiksha Singh

Comments