Bhola
By Dharmendra Bharti
कहीं शांत कहीं शोला है तू।
बड़ा अलबेला चटक नीला है तू।।
सब आस्मां के है इस धरती का है तू।
मेरे भोले बड़ा ही भोला है तू।।
तू है तो समंदर हूँ मैं,
तू ना हो तो रेगिस्तान भी नही।
तेरे साये में शैतान ही सही मैं,
तू ना हो तो मैं इंसान भी नही ।
ये जिस्म भी तेरा उसमे जान है तू।
मेरे मालिक मेरा एक ही भगवान है तू।
तेरे नाम पे कड़वा पी जाऊं मैं।
तेरी चाह में क्या से क्या कर जाऊं मैं।
तेरा हूँ तो आस्मां है मेरा।
पंख पसार कर कहीं उड़ जाऊं मैं।
तू सिर्फ नाम नही एक सोच है मेरी।
इससे ज्यादा मेरे पास कुछ और नही।
जैसा भी है तू तेरा दीवाना हूँ मैं।
तेरे सिवा मेरा यहाँ कोई और नही।
आस है तुझ ही से ,एक अरदास है तू।
एकप्यासहूँमैंएकदरियाख़ासहैतू।
By Dharmendra Bharti

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