Beti Ki Bidai
By Sumit Kumar Agrawal
सातों वचन निभाने का ,वचन देकर विदा होना
यही दुआ करूंगा प्रभु से, सदा तू खुश रहना
आज ये घर तेरा घर है,कल से माइक बन जाएगा
ससुराल को अपना घर मान कर, सदा खुशी से रहना
पैदा हुई थी जिस दिन तु,घर मे खुशियां आई थी
दर्द शह कर भी तेरी मां, खुशी के आंसू बहाई थी
स्कूल मे तेरा पहला दिन ,आंखों से आंसु बही थी
खुद को काबिल बनाने हेतु,खूब तकलीफें सही थी
आज तू कोई बच्ची नहीं है क्या तुझको समझाऊंगा
कैसे ससुराल का मान बढ़ाना ,तुझको न बतलाऊंगा
खुशियों मे न मुस्कुराना लेकिन ,तकलीफ मे खड़े रहना
ससुराल पे कोई उंगली उठाए ,जोर लगाकर अड़े रहना
स्कूल मे अच्छे नंबर ला कर ,मान मेरा बढ़ाया था
पुरस्कार जब मिला तुझको सीने का नाप बढ़ाया था
आज जा रही है विदा होकर ,वैसे ही मान बढ़ा देना
अपने अच्छे कर्मों से ,ससुराल का मान भी बढ़ा देना
खुशी से विदा कर रहा हूँ तुझको,अब तू भी मत रोना
मेरी ग़मो की चिंता मत करना, तू हमेशा खुश रहना
मेरी याद आएगी तुझको ,तो मुझसे मिलने आ जाना
तेरी याद आएगी मुझको तो आंखों से ही बह जाना
By Sumit Kumar Agrawal

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