Bachpan
By Bhavay Goyal
बचपन भी क्या खूबसूरत अफ़साना था
बड़े बड़े सपने थे ,
और मक़सद अंबरों को छू जाना था।
कक्षा में जिनके साथ शोर मचाना था
उन्हें की साथ,
शाम में क्रिकेट खेलना लगता सुहाना था।
होम वर्क ना करने का तैयार बहाना था ,
और सबसे ज़्यादा
सुकून तो क्लास में टिफ़िन खाना था।
कहाँ किसी में अहंक़ार था,
एक पल की लड़ाई
और दूसरे पल फिर वही प्यार था।
बचपन भी क्या ख़ूबसूरत अफ़साना था॥ By Bhavay Goyal

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