Baat Bas Hai To Sukoon Ki
By Tanya Sharma
न बात मज़हब की है
न बात बदन के रंग की
बात बस हैं तो लहजे
और अपने कृम की
तुम क्यों बैर करते हो
मन्दिर और मज़हिद मे
दुआ मज़हिद में हो
या पूजा मन्दिर में
बात बस हैं तो
मन के सुकून की
तुम करते रहो बात
लड़कियों के कपड़े
और हिज़ाब की
बात बस हैं तो अपनी
इज्जत और बचाव की
किसी के काम से उसकी
हैसियत नहीं पता लगती
बात बस है तो अच्छी नीयत
और इंसानियत की
किसी की शकल से उसकी
खूबसूरती नहीं दिखा करती
बात बस है तो साफ़ दिल
और मासूमियत की
तुम उलझे रहो राजनीतिक
बाद-विवाद में
बात बस है तो रोज़गार
और विकास की
न बात किसी के खून की है
न बात किसी की जान की
बात बस है तो सुकून
और ईमान की।
By Tanya Sharma

Comments