Baarish
By Ishita Sharma
बारिश की बरसती बूंदों के साथ तेरी यादों ने आज फिर दस्तक दी है ,
ठहरे हुए मेरे मन में इन्होंने बिन मौसम बरसात की है,
खामोशी से लिखे मेरे सवालों को क्यों तूने कभी पढ़ा नहीं,
क्यों जाने के बाद एक बार भी पीछे तू मुड़ा नहीं,
इस दिल में उठे सवालों के जवाब क्या तू दे पाएगा,
करने इस दर्द को कम क्या तू कभी लौटकर आएगा,
इस बिन मौसम बरसने के पीछे भी कुछ राज़ सा तो होगा,
शायद ये आसमां भी अपनी धरती से कुछ नाराज़ सा तो होगा,
छलका जो दर्द है वो बारिश बनके बह रहा है,
न जाने कितने ज़मानों से वो महोब्बत से अपनी दूर रह रहा है,
टूटे इस दिल में उठा तूफान फिर शांत हो जाएगा,
समंदर तेरी यादों का आंसू बनकर बह जाएगा,
मिल जाएंगे आंसू उन सवालों में,
जिनके जवाब देने कभी तो तू आएगा...
By Ishita Sharma

Comments