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Ankahi Baatein

By Amit Sethia


अनकही बातें

यहां चाहतो का शिला नही,

यहां दोस्ती का मजा नही !

यहां जाने कैसी हवा चली,

यहाँ दोस्तों में वाफा नहीं!


यहां जल गए मेरे आशियाने,

यहा बादलों को पता नहीं!

तेरे दर पे दस्तक दे सकू,

ये हक तो तूने दिया नहीं!





मैं राही हूं राह-ए-उम्मीद का,

मुझे मंजिलों का पता नहीं!

बेबस हूं जहां मैं इस कदर,

जैसे मेरा कोई “खुदा नहीं”!


मेरी सादगी मेरा जुर्म है,

कोई और मेरी खता नहीं!


By Amit Sethia





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Shraddha Chaudhary
Shraddha Chaudhary
May 19, 2023
Rated 5 out of 5 stars.

😪

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awadhesh singh
awadhesh singh
May 17, 2023
Rated 5 out of 5 stars.

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