Andhakaar Ko Mitana Hai
By Damini Akhilesh Dubey
मुझे गाँव में भी एक दीप
ज्ञान का जलाना है,
कुरीतियों को मार
अंधकार को मिटाना है।
चुनाव में खड़ा
छोटी जाति का चमार,
जिसे देश को विकास की
दिशा में लेके जाना है।
ऐसी जातियों के
स्वाभिमान को बचाना है।
उस चमार को समाज की
छोटी सोच से जिताना है।
मुझे गाँव में भी एक दीप
ज्ञान का जलाना है,
कुरीतियों को मार
अंधकार को मिटाना है।
परंपरा के नाम पर,
स्त्री के अभिमान पर,
लग रही जो चोट
उसे जड़ से अब मिटाना है।
ढोंग का घूँघट हटा
वो चेहरा अब दिखाना है।
वैधव्य से मरे हुए
स्त्रीत्व को जिलाना है।
मुझे गाँव में भी एक दीप
ज्ञान का जलाना है,
कुरीतियों को मार
अंधकार को मिटाना है।
जो शक्त है, समर्थ है,
स्वावलंबन का अर्थ है,
उन बेटियों को लज्जा की
कैद से छुड़ाना है।
जो गिरी हुई है सोच,
जिनको बेटियाँ हैं बोझ,
ऐसे बेटियों के दुश्मनों की
सोच को उठाना है।
मुझे गाँव में भी एक दीप
ज्ञान का जलाना है,
कुरीतियों को मार
अंधकार को मिटाना है।
ले जाए जो युवाओं को
अज्ञानता से ज्ञान तक,
स्त्री को लेके जाए जो
हीनता से मान तक,
ले जाए जो इस देश को
पुरानी इसकी शान तक,
देहात में कुछ ऐसा
'रोड' निर्माण करवाना है।
मुझे गाँव में भी एक दीप
ज्ञान का जलाना है,
कुरीतियों को मार
अंधकार को मिटाना है।
जो हटाए भेदभाव
और हटाए जातपात को,
जो हटाए इस समाज से
रूढ़िवादी अंधकार को,
घर के हर मुहाने और
नुक्कड़ों के कोनों पर,
बिजली का ऐसा
एक तार लगवाना है।
मुझे गाँव में भी एक दीप
ज्ञान का जलाना है,
कुरीतियों को मार
अंधकारकोमिटानाहै।
By Damini Akhilesh Dubey

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