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Alag Sa Ek Safar

Nov 10, 2022
1 min read

Updated: Jul 29, 2025

By Shlok Jain


कुछ अलग सफर था,

बहुत कुछ अंजाना,

बेपरवाह सी राहें,

हर पल एक नया सा अहसास,

नए लोग, पुरानी सी एक चाहत,

आंखो में एक अलग सी रोशनी

कुछ तो अलग था।


उन हवा में कहीं एक कशिश सी थी,

अन कहे बेजुबान रस्ते जैसे अपनी एक अलग ही कहानी बया करते थे,

झील में कही एक नई तस्वीर सी नजर आई,

फिर जैसें डूबता सूरज साथ हमें भी समेट ले गया हो,

सितारों से भरा वो आसमान, एक नयाब सा तोफा बन गया था,

साथ था जहां सिर्फ खुद का, जहां खुद से एक नया नाता सा जुड गया था

कुछ तो अलग सा था उस सफर में।


उन घुमव रस्तो में जिंदगी के हर मोड की याद आया,

क्या खोया, क्या पाया, सब सामने था आया,

कुछ बने हुए रास्ते पर, तो कुछ खुद के बने रस्तो पे चलना सिखा,

हाथ पकाड़ के हिम्मत बांधना,

तो कहीं अकेले चल निकलना जरुरी समझा,

द्वार खड़े जब ऊपर उसके,

तो नीचे देख कर कहीं जीत का एहसास सा हुआ,

हवा में कही एक जादू सा था,

सच मे, कुछ अलग अहसास सा था।


सफ़ेद चादर सी लहरती बर्फ,

उन हवाओ का वो नशा,

वो मंजिल फतह करने की खुशी,

सपनों से भी खूबसूरत वो जगह,

जहा कोई नही था तुम्हारे सिवा,

फिर कुछ कमी ना थी,

सब कुछ पूरा था वहा,

सच में, कुछ अलग सा था वहा।।


By Shlok Jain





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