Aaj Dekha Hai
Updated: Sep 16, 2025
By Pranjal Saikia
आज देखा है,
रोते हुए हँसते चेहरे को,
एक काँटों भरी मुसकुराहट लेकर, प्यार बरसाते हुए
देखा है
सहते हुऐ
बेआबरू होते हुए - आबरू को
आज देखा है
छलनी होते हुए सीने को
अपने बनाये कारतूसो से,
देखा है, रक्षक को भक्षक बनते हुए
देखा है, बिन मदिरा के होश खोते हुए
देखा है,
क्रुन्दन से चल्लाते हुए,
अपनो के दामन को उछालते हुए
उस लज्जा हिन मनुष्य को,
एक लज्जा को नष्ट करते हुए
देखा है,
उस अनजाने नरक को,
यही एक हिन्शक रूप में,
रात के सन्नाटे, भरे दिन को
सूरज के प्रकाश को भी लुप्त होते हुए,
चांदा की शीतलता को भी गरम होते हुए
देखा है,
चीखते हुए खुद के ह्रदय को, रोते हुए मन को……… !!
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By Pranjal Saikia

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