Aaghaaz/आग़ाज़
By Amartya Vardhan
कहते हैं कि हर पल का हज़ार हिस्सा है
और इन बीते हुए बरस कि पल में
आप सब के अपने आप का किस्सा है।
अपने नूर, अपने सहनत,
अपने धूप, अपने किस्मत,
हर कदम बनातें कल है या लोरी
बिना हम साते, हर पल हो तन्हाई।
न जाने कोइ
इस पल का ग़ुलाम हो या आज़ाद
इस पल का अंत हो या आगाज़ ।
By Amartya Vardhan

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